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कहां से चले थे 2 by SHIVAJI GHUGE (RAJE)

SongGPT
कहां से चले थे 2 by SHIVAJI GHUGE (RAJE) - Indian, Ballad,Neutral Vocals music cover art

कहां से चले थे 2

Indian, Ballad,Neutral Vocals

0:003:37
Lyrics
Description
(Verse 1)
कहां से चले थे, अब कहां आ गए हम
सन्नाटे में छुपा है, टूटे हुए हमदम
धुंधली सी राहों में, जलती हैं परछाइयां
हर कदम पे उठते हैं, अधूरे सवाल हमारे
(Pre-Chorus)
तेरी उंगली थामे हुए, जैसे डूबती शाम
सांसों की सरहद पे, जलता है दिल का जाम
सपनों के राख में छिपा है इक उजाला
डर के साये में भी, है उम्मीदों का फसाना
(Chorus)
कहां से चले थे, कहां आ गए हम
गम के सागर में, डूबते हुए हम
राहों के बीच में, जले हैं जो जज़्बात
फिर भी धड़कते हैं, तेरे नाम के साथ
(Verse 2)
जिंदगी की आग में, जलते हैं अरमां
आंसुओं की नदियों में, बहते हैं जज्बात
हर धड़कन में छुपा है, एक टूटता सा सफ़र
तेरे बिना भी, जी रहे हम इस बरस
(Pre-Chorus)
तेरी उंगली थामे हुए, जैसे डूबती शाम
सांसों की सरहद पे, जलता है दिल का जाम
सपनों के राख में छिपा है इक उजाला
डर के साये में भी, है उम्मीदों का फसाना
(Chorus)
कहां से चले थे, कहां आ गए हम
गम के सागर में, डूबते हुए हम
राहों के बीच में, जले हैं जो जज़्बात
फिर भी धड़कते हैं, तेरे नाम के साथ
(Bridge - softer, introspective)
जलते हैं दिल के दीये, बुझते नहीं कभी
तेरे साथ ये सफ़र, है जज़्बात की क़सक
हर दर्द, हर खुशी में, तेरा हाथ चाहिए
साथ तेरे ही तो है, ये धड़कन की रफ़्तार
(Outro - delicate, hopeful)
कहां से चले थे, अब कहां आ गए हम
मगर तेरे प्यार से, फिर भी चल पड़े हम
ग़मों की भीड़ में, तेरा नाम लिए
साथ तेरे जीते हैं, हर पल हर दिन