कमकाल, लकड़बग्गा और सूर्रा का हंगामा 1 by Reshma

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कमकाल, लकड़बग्गा और सूर्रा का हंगामा 1 by Reshma - Indian Folk Fusion music cover art

कमकाल, लकड़बग्गा और सूर्रा का हंगामा 1

Reshma

Indian Folk Fusion

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Lyrics
Description
सुबह की पहली किरण सुनाए कहानी ये रात की, कमकाल, लकड़बदग्गा, सूर्रा की दोस्ती का जुनून. Do not mention sound effects or instruments in the lyrics
रात गहरी पर जंगल कही सुना सुना, चिप चिप के चलती परचाई, आज कुछ नय कहे, सूरा ने धुम बजाई, जैसे हवा में गीत, कमकाले मुस्कुरा के पूछा, क्या ये ससर कोई जीत?
कमकाले, कमकाले, जैसे चांद की चया झले है साथ, लकड़बददग्गा, लकड़बददग्गा, तुममीर दिख के रण बन जल के रात, सूरा सूरा थीनों मिलके मचाई हगा, माज़ि, पिर्दों की चाउं में जंग की कुछ न कही बाते,
लकड़बदददग्गा ने कहा, आगे बर खमुशी थूते, सूरा ने साझ सरकाया ताल पर लहरे झेजी, कमकाल बोलादर नहीं साथ है हम सब की तोली,
कमकाल, कमकाल, जैसे चांद की शया चले साथ, लकड़बददददग्गा, लकड़बददददददग्गा, अमीद की किरन बन जल के रात, सूरा सूरा थीनों मिलके मचाई हगा, माज़ि,
ताले से तमका जो दिलों का कालवां, नदान ससर में मिली जो दोसती जहाँ, कमकाल के शबदों में छुपा है जो जुनू, लकड़बददददददददददग्गा की हसी में किला है सावन का जुनू, सूरा के सुरों से बजी ये जग की धूं,
कमकाल, कमकाल, जैसे चांद के छया चले साथ, लकड़बदा, लकड़बदा, उम्मीद की किरन बन जल के रात, सूरा, सूरा, थीनों मिलके निजाए हगा माज,
सुप की बली किरन, सुनाए ख़ाणी ये रात, कूल काल, कमकाल, जैसे चांद की छया चले साथ, लकड़बदा, लकड़बदा, उम्मीद की किरन बन जल के रात, सूरा, सूरा, थीनों मिलके निजाए हगा माज,
सुप की बली किरन, सुनाए ख़ाणी ये रात, कूल काल,