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कबीर की वाणी 1 by kumar

SongGPT
कबीर की वाणी 1 by kumar - Spiritual music cover art

कबीर की वाणी 1

Spiritual

0:003:24
Lyrics
Description
ऐसी वाणी बोलिए मन का आप खोए, औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।
तिनका कबहूं ना निंदिये, जो पांव तले होय।
कबहूं उड़ आंखों मे पड़े, पीर घनेरी होय।
तिनका को भी छोटा नहीं समझना चाहिए चाहे वो आपके पांव तले हीं क्यूं न हो क्यूकि यदि वह उड़कर आपकी आंखों में चला जाए तो बहुत तकलीफ देता है।
कथा कीर्तन कुल विशे, भव सागर की नाव।
क़हत कबीरा या जगत, नाहीं और उपाय।
कबीरदास जी कहते हैं कि संसार रूपी भवसागर से पार उतरने के लिए कथा-कीर्तन की नाव चाहिए इसके सिवाय पार उतरने के लिए और कोई उपाय नहीं।
कबीर सुता क्या करे, जागी न जपे मुरारी।
एक दिन तू भी सोवेगा, लम्बे पांव पसारी।
कबीर दास जी हमें कहते हैं, कि, तू हमेशा सोया क्यों रहता है, उठकर भगवान को याद कर,उनकी आराधना कर, एक दिन ऐसा आएगा जब तू लंबे समय तक सोया ही रह जाएगा.