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ओ नमेरी: प्रकृति का गीत 1 by manjit

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ओ नमेरी: प्रकृति का गीत 1 by manjit - फोक सॉन्ग music cover art

ओ नमेरी: प्रकृति का गीत 1

फोक सॉन्ग

0:004:55
Lyrics
Description
गो नमेरी, ओ नमेरी, तु प्रकृति का गीत, तेरी हवा में बसता है, सुकून और प्रीत।
गो नमेरी, ओ नमेरी, तु प्रकृति का गीत, तेरी हवा में बसता है, सुकून और प्रीत।
हर पत्ता गुन गुनाए, हर नदी सुनाए, तेरी गोद में जीवन मुस्कुलाए।
गने जंगलों में सुरज की किरने, हाथियों की चाल में धरती की धरकने, और नबील की फुका, कुञ्जे आसमा, हर कोना कहता है तु है महाँ।
हो नमें, हो नमें, भैलों के निशान तेरे, दूल की कुछ भूमें कोया, हर सबसर मेरा, पतियों के साए में, चुप के दिल फुद काई, तेरी बाहों में जो सुकून कहीं और न पाई।
लाफ्टनेंग की लहयों पे दिल लूर चला, नदी के संग जैसे सपना बह चला, हर कदम पे मिलती है नई कहानी, नमेरी की धरती जैसे कोई रभानी।
ओ नमेरी, ओ नमेरी, पैरों के दिशाँ तेरे, दूलल की कुश्बु में कोया, हर सबसर मेरा, पतियों के साए में, चुप के दिल फुद काई, तेरी बाहों में जो सुकून कहीं और न पाई।
ओ नमेरी, तेरे रगों में रुख जाना, तेरे गीतों में दिल अपना सुनाना, जहाँ भी जाऊं, तेरे आदियों में कराना, तेरे बाहों में जो सुकून कहीं और न पाई।
तेरे रगों में रुख जाना, तेरे गीतों में दिल अपना सुनाना, जहाँ भी जाऊं, तेरे आदियों में कराना, तुझों में बसा मेरा भाब प्रिती।
Thank you for watching it.