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एक बार फिर से 1 by ফাজলামি

SongGPT
एक बार फिर से 1 by ফাজলামি - Romantic,both vocals music cover art

एक बार फिर से 1

Romantic,both vocals

0:003:38
Lyrics
Description
चेक इट, एक बार फिर से, हवाएँ छू के निकली,
वो दक्खिन की हवा, जो तुझको थी सहलाती।
एक बार फिर से, तू अकेला ही है बैठा,
सितारे गिन रहा, बस इंतज़ार में रातें बिताती।
एक बार फिर से, पकड़ी तूने जुगनू की रोशनी,
हाथों से ढँक के, उसकी चमक को है देखा।
और एक बार फिर से, मैं तुझको देख रहा हूँ,
बहुत दूर से, ये है मेरा अकेला रेखा。
(Verse 2)
याद है वो पल, जब हँसी गूँजती थी चारों ओर,
अब खामोशी छाई, बस तेरी आँखों में है ज़ोर।
किस बात की तलाश, क्या है वो अधूरापन?
जिसे भरने निकला तू, छोड़ के ये अपनापन।
हर आहट पे ध्यान, हर साए में तेरा नाम,
क्या ढूंढ रहा खुद में, या बस कर रहा आराम?
तेरी हर साँस में है एक अनकही कहानी,
जो मेरी नज़रों से है अब भी जानी-पहचानी。
(Chorus)
तो एक बार फिर से, तू वही है, मैं जानता हूँ,
वही चेहरा, वही दिल, जिसे मैं पहचानता हूँ।
दूरी क्या मिटाएगी, ये रूह का है रिश्ता,
तू वहाँ अकेला, मैं यहाँ से हूँ देखता।
और ये हवाएँ, जो तुझको छू के गुज़रती हैं,
ये पैगाम मेरा, तुझ तक पहुँचाती फिरती हैं。
(Bridge)
ये जुगनू की चमक, क्या किसी उम्मीद की किरण है?
या बस एक लम्हा है, जो देता तुझे सुकून है?
मैं भी यहाँ बैठा, उन यादों में खोया हुआ,
कैसे तूने सब कुछ, चुपचाप है समोया हुआ।
काश ये दूरियाँ, एक पल में सिमट जातीं,
और तेरी तन्हाई, मुझसे लिपट जाती。
(Outro)
तो बस एक बार फिर से...
तू वहाँ है, मैं यहाँ से...
देख रहा हूँ...
हमेशा।