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उठो — गाँव की बेटी का गीत 1 by Shinchan

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उठो — गाँव की बेटी का गीत 1 by Shinchan - बॉलीवुड, भारतीय शास्त्रीय सिनेमा, महिला वोकल,महिला music cover art

उठो — गाँव की बेटी का गीत 1

बॉलीवुड, भारतीय शास्त्रीय सिनेमा, महिला वोकल,महिला

0:003:51
Lyrics
Description
[पहला अंतरा]
खिड़की की किरण छूए लाल मिट्टी का पाटा,
काँधे पर झोला, छोटे हाथों में बड़ा ख्वाब साथा।
पानी की बाल्टी हँसते-हँसते घाट पे झुले,
नन्हे कदमों से टूटे कल की पुरानी बाधा।
[पूर्वकोरस]
हाथों में छुपा हौसले का बीज उठेगा, (ऊँचा)
धीरे-धीरे बढ़े ये जज़्बा, आग बनें ये कदम हमारे।
कूँअर की तरह नाचे दिल, उम्मीदों की राह पे, (जोर से)
हर फुसफुसाहट दे प्यार, हर कण बोले हाँ।
[कोरस]
उठो उठो, कदम बढ़ाओ,
खेतों में जला दो उजाला।
जो बोया है, कल बढ़ेगा,
उठो — यही हमारी ताकत।
[दूसरा अंतरा]
पानी की रेखा, बैलों की घंटी, मेले की दहलीज़ पर गीत,
स्कूल की घंटी, पिटारी में किताबें, सपने करे पंघुड़ियाँ चीत।
चौपाल में बसी कहानियाँ, रसोई में गुंजे ममता का सुर,
छोटी सी चाल से खुलता द्वार, बदलता हर एक नसीब और सुर।
[पूर्वकोरस 2]
गली-गली गीत गूँजें, मिट्टी में सीनी खुशबू,
हाथ जो बोया, बढ़े भरोसे के साथ, बढ़े ये नन्हा जुझ।
आंगन से आसमान तक उठे आवाज़, बनें सूरज की राह,
हर कदम बोले वादा, हर ताल दे नया इरादा।
[कोरस]
उठो उठो, कदम बढ़ाओ,
खेतों में जला दो उजाला।
जो बोया है, कल बढ़ेगा,
उठो — यही हमारी ताकत।
[सेतु / ब्रिज]
(आवाज़) "उठो!" — गाँव उठता है जवाब,
(प्रतिसाद) "रोशनी!" — दिलों की धड़कन बने ताल।
काँधे से काँधा मिलाकर, गोद में गीत सजाकर,
मेले की तरह जश्न, मिट्टी से उठे नया कमाल।
[अंतिम कोरस — एन्थम]
उठो, उठो, अब सब मिल गाओ,
खेतों में भर दो उजा