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आत्मा का प्रकाश 1 by INDIAN

SongGPT
आत्मा का प्रकाश 1 by INDIAN - Spiritual music cover art

आत्मा का प्रकाश 1

Spiritual

0:003:25
Lyrics
Description
तीनलोक के सिखामणि पर आत्म सिखा लहराएंगे।
सम्यक दर्श की सीखा सहारे भव से हम तीर जायेंगे।।
क्षीरोदधि का शीतल जल भी प्यास कभी न बुझा पाया।
इसलिए प्रभु तुम दर्शन से निज दर्शन करने आया।।
यह कर्म थर थर कापते जब स्वसन्मुख में आता हूँ।
हूँ स्वयं सिद्ध उन सब सिद्धोंसम जब निज को मैं ध्याता हूँ।।
आत्म तत्त्व ही सबसे शीतल इसे कभी न जाना है।
निज निधि निज में पाने को अब शरण तुम्हारी आना है।।
देख-देखकर भगवन तुमको मैं अति ही हर्षाता हूं।
निज से उत्तम अन्य कुछ नहीं देख आपको पाता हूं।।
यह कर्म थर थर कापते जब स्वसन्मुख में आता हूँ।
हूँ स्वयं सिद्ध उन सब सिद्धोंसम जब निज को मैं ध्याता हूँ।।
जग के सारे जड़ पदार्थ तो क्षत स्वभाव वाले ही है।
मैं तो एक अखंड अविनाशी अक्षत स्वभाव वाला ही हूं।।
विभाव भावों से भी मैं कभी क्षतिग्रस्त नहीं हो पाता।
इन सब से निर्लिप्त सदा मैं ध्रुव की बस्ती में रहता।।
यह कर्म थर थर कापते जब स्वसन्मुख में आता हूँ।
हूँ स्वयं सिद्ध उन सब सिद्धोंसम जब निज को मैं ध्याता हूँ।।
मैं देव नहीं ना मनुष्य मैं ना नारकी ना तिर्यांच हूं मैं।
यह सब अवस्था पुदगल की कर्मोदय से न्यारा हूं मैं।।
मैं ने नहीं ना नारायण मैं पशु नहीं मैं परमेश्वर।
बनना नहीं मुझको कभी मैं बना बनाया आत्मेश्वर।।
यह कर्म थर थर कापते जब स्वसन्मुख में आता हूँ।
हूँ स्वयं सिद्ध उन सब सिद्धोंसम जब निज को मैं ध्यात