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आओ कल्कि! 2 by Aditya

SongGPT
आओ कल्कि! 2 by Aditya - Indian,both vocals music cover art

आओ कल्कि! 2

Indian,both vocals

0:003:44
Lyrics
Description
हे विष्णु के दशम रूप, हे कल्कि अवतारी,
अब देर न कर, हे प्रभु! अब युग पुकारे तुम्हारी।
धर्म छूट गया हाथों से, न्याय सो रहा गलियों में,
लोभ, छल और पाप नाचे खुलकर इन मंडलियों में।
मंदिर सूने पड़ गए, आरती का स्वर भी काँपता है,
भक्त बेचैन हैं, हर तरफ तेरा ही नाम जापता है।
गायत्री की ध्वनि दब गई, क्रूरता के शोर में,
अब सत्य घुटने टेक रहा, झूठ के प्रबल जोर में।
हे प्रभु! जब तू राम बना था, वन गया और युद्ध रचा,
जब तू कृष्ण बना, धर्म की रचना फिर से रचा।
अब तू कल्कि बन, काल बन, पाप का अंत कर,
धरा को फिर से धर्म दे, शुद्धता का पुनः जन्म कर।
तेरा रथ कब आएगा? वो श्वेत अश्व कब दौड़ेगा?
कब दुष्टों की रात कटेगी? कब सूर्य फिर से चढ़ेगा?
तेरे हाथों में तलवार नहीं, ये दया की आग है,
जो जलाएगी अधर्म को, और न्याय को भाग्य देगी।
देख, मासूमियत रो रही है, नारी असहाय है,
बेटी डरती है अब जन्म लेने से भी, ये कैसी माया है?
हे कल्कि! अब तेरे सिवा कोई राह शेष नहीं,
तेरा नाम ही अब रक्षा है, और कोई विशेष नहीं।
आकाश भी प्रतीक्षा में है, धरती भी थक चली,
पर्वत, नदियाँ, पेड़, पशु — सबने भी विनती कर ली।
तू ही आशा है, तू ही गति है, तू ही अंतिम सत्य है,
तू न आए अगर अब भी, तो यह सृष्टि अधूरी रह जाएगी।
हे प्रभु! तू जब चलेगा, ध्वनि गूंजेगी आकाशों में,
तेरे चरणों की गति से कांप उठेगा हर पापों में।
कल्कि तू नाश करेगा, हर उस विचार का,
जो मनुष्यता को खंडित करे, धर्म