अयोध्या लौटे श्रीराम 2 by Divakar

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अयोध्या लौटे श्रीराम 2 by Divakar - blues,male vocals music cover art

अयोध्या लौटे श्रीराम 2

blues,male vocals

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Lyrics
Description
[Intro]
(Soft harmonica wails)
सुनो, सुनो, अयोध्या की गली में,
घंटी बजती है, दीप जले, राम का घर सजता है।
[Verse 1]
बनवास के जख्म अभी भी दिल में तरे,
सफेद धूप में छांव सी, उनकी यादें बहरे।
पल्की की चरमराहट, कदमों की रुनझुन,
गंगा के घाट पर फूलों की बौछार, राम लौटे सुन।
[Chorus]
अयोध्या लौटे श्रीराम — जय, जय, श्रीराम!
हर दिल में उमंग छाई — जय, जय, श्रीराम!
(Call & Response with choir and handclaps)
अयोध्या लौटे श्रीराम — जय, जय, श्रीराम!
[Verse 2]
सांझ की हवा में खुशबू है केसर की,
धूप-छाँव की लहरें, बजती हैं मंजीरों की थाप।
सखी-सखा संग गाते, भजन की मधुर तान,
हनुमान की गूँजती जयकार, हर गली हर स्थान।
[Chorus]
अयोध्या लौटे श्रीराम — जय, जय, श्रीराम!
हर दिल में उमंग छाई — जय, जय, श्रीराम!
(Repeat with rising energy)
[Bridge]
विवशता की वो रातें, अश्रु बनकर बहे,
अब दीपक बनके जले, अंधियारा सब छेड़े।
मौन ताकत उनकी, बहे जैसे नदी की धारा,
घर वापसी का ये गीत, दिलों को करे किनारा।
[Chorus]
अयोध्या लौटे श्रीराम — जय, जय, श्रीराम!
हर दिल में उमंग छाई — जय, जय, श्रीराम!
[Outro]
(Soft harmonica and guitar solo)
घंटी की तान, दीपों का प्रकाश,
राम की वापसी, जीवन में नव आश।
अयोध्या के द्वार खुले, स्वागत में हर आवाज,
जय श्रीराम, जय श्रीराम, गूंजे हर आंगन-आंगन।